पानी आया,जीवन लाया... डोंगरीपाडा (महाराष्ट्र ) एक आधुनिक संत – माधवराव काणे हम रहें या ना रहें, भारत ये रहना चाहिये।

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की वेबसाइट 

जम्मू कश्मीर, त्रिपुरा, भोपाल, इंदौर, केरल की सेवा भारती संस्थानों से चल रही अनूठी योजनाएं।

आगरा सेवा भारती मातृ मंडल की बहनों द्वारा राशन सलेकर सेनेटरी नैपकिन वितरण करते हुए।

सेवादूत

सेवा को समर्पित भारतीय नारी

रश्मि दाधीच

2020-08-28 15:03:56

बेतरतीब पड़े, एक छोटे से कमरे में टी बी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा 11 बरस का बालक सोनू, अपनी 6वर्षीय बहन खुशबू के साथ कहीं से मांगकर लाई दाल को आज भी पानी से छौंकने की तैयारी कर रहा था । तभी रीना दीदी किशोरी विकास केंद्र की लडकियों के साथ राशन किट लेकर उसके पास पहुंची, तो सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ये तो सिर्फ़ शुरुआत थी, आगरा की बस्ती में रहने वाले इन अनाथ भाई बहनों की देखरेख के साथ ही, पढाई व दवाई की व्यवस्था भी अब आगरा सेवाभारती मातृमंडल की बहनें कर रही ह़ै।

इन बहनों ने प्रवासी श्रमिकों के परिवार की महिलाओं की उस व्यथा को भी समझा, जो वो किसी से कह नहीं पाई।पैसों की तंगी, मीलों का सफर, ऊपर से महावारी की समस्या, इन मजदूर महिलाओं की ऐसी हालत देखकर, सेवा भारती संरक्षिका आगरा डॉ रेणुका उत्सव की सहायता से, सेवाभारती मातृमंडल की बौद्धिक प्रमुख रीना सिंह के साथ ममता सिंह, सुप्रिया जैन, अंजली गौतम, और सुष्मिता सिंह की यह टोली इन प्रवासी महिलाओं के अलावा बस स्टैंड, कच्ची बस्तियों में रहने वाली गरीब महिलाओं को, निशुल्क सेनेटरी नैपकिन बांटने निकल पड़ी। आगरा व आसपास की 127 बस्तियों में 20000 महिलाओं को नैपकिंस बांटे गए व कोरोनाकाल में स्वस्थ रहने के टिप्स भी दिए।

कहते है एक मां जब अपना आंचल पसारती है, तो सम्पूर्ण सृष्टि उसमें समा जाती है।देशभर में सेवाभारती मातृमंडल की महिलाओं ने कोरोनाकाल की मुश्किलों से जूझ रहे लोगों को, राशन बांटने से लेकर मास्क, पीपीई किट, सत्तू, आचार, पापड़, राखियां बनाने व कोरोना पाजिटिव मरीजों के लिए हेल्पलाइन चलाने जैसे अनेक कार्य किए।
आईए मिलते हैं, त्रिपुरा के धनपुर में रहने वाली मीरा साह से ,जिन्होंने.कोरोनाकाल में पति की मृत्यु के बाद स्वयं के अवसाद से लड़कर, "गंगा सेवा संस्थान" के तत्वावधान में 25 बहनों को मास्क व अन्य जरूरी कपडे सिलने की ट्रेनिंग दी व रात-दिन मास्क बनाए।जिनसे इन घरों में चूल्हा जला।

यूं तो मांगीलाल (एक वृद्ध भिखारी) रोज 10 रू में सोलापुर में उद्योगवर्धिनी की रसोई से एक थाली लेकर जाते थे, पर लॉकडाउन में जब वे 2थालियां लेकर जाने लगे,तो चन्द्रिका ताई ने देखा कि वो भीख से मिले पैसों से दूसरे भिखारियों को भी खिला रहे है । यह देख एक मां का दिल भर आया, राष्ट्रीय सेवाभारती के ट्रस्टी बोर्ड की सहसचिव चंद्रिका चौहान ने आसपास के सभी मंदिरों के भिखारियों, बस्तियों के लाचार दिव्यांगो के साथ, घरों में बैठे बुजुर्गों को लाकडाऊन की अवधि के लिये, नि:शुल्क भोजन पहुंचाना शुरु कर दिया ।26 मार्च से लगातार 4 महीने 250 से अधिक लोगों को नि:शुलक व सैंकडों प्रवासी श्रमिकों को मात्र 20 ऱ में भरपेट भोजन कराया, इन सेवाभावी महिलाओं ने।
संघ के संस्कारों में रची - बसी इन महिलाओं की सेवायात्रा की चर्चा करने पर सेवाभारती की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमिता जैन, भोपाल की 82 वर्ष की हरिदिनी जोशी, व80वर्षीय प्रकाश खनुजा, का उदाहरण देती है, जिन्होंने इस उम्र में दिन-रात मास्क सिलकर सेवाबस्तियों में निःशुल्क बांटे।
भाई की कलाई कहीं सूनी ना रह जाए, बहन की इसी चिंता को दूर करते हुए, 65 वर्ष की आरती दीदी, सविता दीदी ने, बुरहानपुर की बहन मेघा की राखी, कंकू, चांवल, नारियल के साथ धनवंतरी कॉलोनी में, उनके भाई के घर पहुँचाई। मालवा प्रांत के 9 शहरों में बहनों ने राखियां बनाकर जरूरतमंद महिलाओं को आय का जरिया तो दिया ही, हाटस्पाट बने इंदौर में बहनों की राखियां भाईयों तक पहुंचाकर, इस अनूठे सेवा कार्य से रक्षाबंधन पर्व अविस्मरणीय बना दिया।

सेवाभारती मातृमंडल मालवा प्रांत की संयोजिका सुनीता ताई बताती हैं, कि बहनों ने लाकडाऊन के दौरान कुछ आलू की चिप्स, आम पापड़, लहसुन का अचार, मिनी समोसा, जैसी कई खाद्य सामग्री अच्छी पैकेजिंग के साथ बेच कर, कोरोना काल में ही"मां अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह" संस्था का निर्माण किया व कई परिवारों को आर्थिक दिक्कतों से उबारा।

जम्मू कश्मीर के नगरौटा का उदाहरण भी इससे अलग नहीं है, विस्थापित कश्मीरी पंडितो के लिए बसाई गई जगती कालोनी के परिवारों पर, जब लाकडाऊन के दौरान आर्थिक संकट गहराया, तो अंजलि दीदी के नेतृत्व में 100 परिवारों की बहनों ने मास्क , पीपीई किट सिलने से लेकर, अचार बेचकर, अपने घर का खर्च चलाया।
कोरोना काल में पाजिटिव मरीजों को फ़ोन कर उनकी परेशानी दूर करने व मनोबल बढ़ाने का काम भी हमारी बहनों ने किया। 2 दिन से फोन में रिचार्ज खत्म होने की चिंता करती, 70 वर्ष की अकेली बुजुर्ग अम्मा ने, फोन पर जब एक अजनबी महिला की मधुर आवाज सुनी,- आप कैसे हैं???
आपको कोई परेशानी तो नहीं???
उन्हें लगा, जैसे स्वयं भगवान ने ही उनकी सुध ली हो।
भोपाल महानगर महिला सह संयोजिका आभा पांडे दीदी व उनकी मातृमंडल की सखियों ने, "सेवा भारती दूरभाष मित्र अभियान" के इस प्रशंसनीय कार्यक्रम से 1400 लोग जिनमें कोरोना पॉजिटिव मरीज, सस्पेक्टेड लोग और बुजुर्ग, सभी की लिस्ट प्रशासन से लेकर, 24घंट़ों के भीतर फोन रिचार्ज कर, दवाइयां पहुंचा कर, कोरोना पॉजिटिव परिवारों की काउंसलिंग कर, अनेक लोगों के मन में पसरे अंधेरे को रोशनी से भर दिया ।

देशभर में कार्य कर रही, सेवा भारती की बहनों ने कुछ जगहों पर मेडिकल हेल्पलाइन भी चलाई। तेलंगाना की संयुक्त सचिव जयाप्रदा दीदी बताती है- हैदराबाद में चल रहे, सेवा भारती कोविड- हेल्प लाइन कॉल सेंटर में 50 किशोरी व महिलाओं की टीम है, जो डॉक्टर्स के सहयोग से लोगों का घर पर ही, सर्दी, जुखाम, बुखार इत्यादि का इलाज कर रही है, गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित हॉस्पिटल्स का रास्ता दिखा रही है तथा स्वयं सेवक भाइयों की मदद से ५०० से ज़्यादा कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों के लिए, घर पर ही कोरोना किट बनाकर भेज रही है।
इतिहास साक्षी है,जब भी समय ने नारी के धैर्य की परीक्षा ली, नारी ने चुनौतियों से लड़कर नई ऊर्जा को जन्म दिया है। देश पर मंडराते करोना संकट में, राष्ट्रीय सेवा भारती, मातृमंडल की महिलाओं ने किसी की मां, किसी की बहन, तो किसी की बेटी बनकर, मुश्किलजदा लोगों को सहारा दिया है।

 

कोरोनाकाल की व्यथाएं व इनसे जुडी सेवाकथाएं यूं ही चलती रहेंगी। अगली कथा अगले अंक में।