पानी आया,जीवन लाया... डोंगरीपाडा (महाराष्ट्र ) एक आधुनिक संत – माधवराव काणे हम रहें या ना रहें, भारत ये रहना चाहिये।

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की वेबसाइट 

परिवर्तन यात्रा

विद्यार्थी विकास केंद्र में योगाभ्यास करते बच्चे

उम्मीद की नई किरण सावित्रीबाई फुले एकात्म समाज मंडल(औरंगाबाद महाराष्ट्र)

रश्मि दाधीच

औरंगाबाद के पास एक छोटे से गांव खामखेडा में 65 वर्ष की भामा आजी की आंखें भर आई जब आज पहली बार वह सरकारी कागजों पर अंगूठे की जगह अपनी कलम से हस्ताक्षर कर रही थी। बरसों से अपने गांव को जानती है पर आज बस पर लिखे अपने गांव के नाम "खामखेडा " को जोर जोर से पढ़कर स

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समर्पित जीवन

काणेजी का तपस्या स्थल- तलासरी छात्रावास

एक आधुनिक संत – माधवराव काणे

विजयलक्ष्मी सिंह

 

 

सर्दी, गर्मी और वर्षा हर मौसम में पैरों में हवाई चप्पल तन पर बेहद साधारण कुर्ता-धोती पहने तलासरी के बीहड़ वनवासी गांवों में लम्बी लम्बी दूरी पैदल चलकर वहां के बच्चों के लिए ज्ञान के दरवाजे खोलने वाले माधवराव जी काणे  का जीवन

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सेवादूत

हम रहें या ना रहें, भारत ये रहना चाहिये।

विजयलक्ष्मी सिंह

कभी-कभी सच में मनुष्य पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ता है। भोपाल में अरेरा कॉलोनी के पॉश इलाके में किराये पर एक कमरा लेकर रहने वाली कल्पना विश्वकर्मा की कहानी भी कुछ ऐसा ही दर्द बयां करती है। एक पैर में गैंगरीन की वजह से लगभग अपाहिज हो चुकी गर्भवती कल्पना के लिए कोरोना काल अनगिनत मुसीबतें लेकर आया। एक तरफ उसके ससुर द्वारका प्रसाद विश्वकर्मा कोरोना संक्रमित होने के बाद जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहे थे, तो दूसरी तरफ ऑटोचालक पति सोनू का रोजगार लाॅकडाऊन ने छीन लिया था।पेट में नन्हीं-सी जान लिए कल्पना के लिए ससुर के इलाज का खर्च जुटाना मुश्किल था, वहीं वो खुद भी दाने-दाने के लिए तरस रही थी। जब उसकी ये व्यथा भोपाल में सेवा भारती की महानगर महिला संयोजिका आभा दीदी तक पहुंचीं तो मानों सेवा भारती के रूप में साक्षात ईश्वर के द्वार उसके लिए खुल गये। सेवा के लिए संकल्पित सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने कल्पना के परिवार की सारी जिम्मेदारी अपने सर उठा ली। पहले उनके ससुर जी का इलाज करवाने के प्रयास किए किन्तु

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