आंस्मा तक जा पहुंची शिक्षा की उड़ान -डबरा का आवासीय विद्यालय | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी | स्वयंसेवकों के साहस के सामने भीषण आग ने किया समर्पण - दामूनगर त्रासदी

सेवागाथा - संघ के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

परिवर्तन यात्रा

हमें आजाद भारत में साँस लेते हुए आज सात दशक बीत चुके हैं ।, इन 70 वर्षों में सड़कों, रेलवे लाइनों, बिजली व टेलीफोन की तारों का जाल देशभर में फैल गया है ।गगनचुंबी इमारतें ., बड़े-बड़े शाँपिंग माल्स, मैट्रो स्टेशन, विकास की कहानी कहते नजर आते हैं । साधारण किसान से लेकर सब्जी का ठेला लगाने वाले के हाथ में एंडराईड्स फोन देखकर कितना भला लगता हैं।पर एक सच और है ,अब भी हजारों लोग फुटपाथ से लेकर रेलवे प्लेटफार्म पर सर्द रातों से लेकर बरसती शामों में बहुत कम कपड़ों में जिंदगी के लिए लड़ते  नजर आते हैं । कहीं झुग्गियों में सुअरों के बीच लोट रहे बच्चे , तो कहीं गरीबी की मार झेल रहे, बगैर इलाज के तड़प-तड़प कर मर रहे लोग ।भारत के कितने ही गाँवों में आज भी न सड़कें पहुँची न बिजली न ही शिक्षा का उजाला । विकास की इस दौड़ में देश के 40 प्रतिशत लोग तो पीछे ही छूट गए ।जिनके पास सरकार नहीं पहुँची समाज नहीं पहुँचा, साधु महात्मा नहीं पहुँचे उनके आँसू पोंछने उन्हें पढ़ाने आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके पास पहुँचे संघ के स्वयंसेवक ।

नगर के इस घोर गरीब तबके से लेकर गाँवों में विकास की बाट जो रहे लोगों के बीच संघ के स्वयमसेवकों ने छोटी- छोटी संस्थाओं के जरिए,रचनात्मक कार्यों में ,लोगों से सहयोग लेकर , योजनाबध्द तरीके से प्रयास किए । 50 वर्षों से निरंतर चल रही इस साधना ने वो कर दिखाया  जिसकी कल्पना खुद संघ को भी नहीं थी ।

मध्यप्रदेश के धार जिले का सुंद्रैल गांव हो, पुणे का शिवे ग्राम या फिर उत्तराखंड का बछेर ,ये सभी गांव, यहाँ चल रही शाखा से निकले नौजवान स्वयंसेवकों के प्रयासों से आदर्श गांव बन चुके हैं । देश के सैंकड़ों गाँवों में जैविक खाद ,सौर ऊर्जा, संस्कारमय शिक्षा,स्वास्थ्य चेतना हर आयाम पर काम कर इन सेवाव्रतियों  ने गाँवों की तस्वीर बदल दी है ।

शिक्षा के क्षेत्र में तो अद्भुत कार्य हुआ है । हजारों बाल संस्कार केंद्रों ,विशेष विद्यालयों,,कई जनजातीय छात्रावासों , के जरिए मलीन बस्तियों से लेकर घुमंतु जातियों के बच्चों को पढाकर , सक्षम व देशभक्त नागरिक बनाने में लगी हैं संघ प्रेरित संस्थाएँ। अनाथ बच्चों के लिए मातृछाया , मनोरोगियों के लिए लिए अरूण चेतना, नई पीढ़ी को देश से जोड़ने के लिए यूथ फार सेवा कार्य कर रही हैं । कहीं कैंसर व हार्ट की बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के अटैंडेंट्स के लिए भोजन व रहने की व्यवस्था की गई हैं,तो कहीं कुष्ठ रोगियों के लिए आश्रम खोले गए  हैं ।तो कहीं महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही हैं । हरि अनंत हरि कथा अनंता की तर्ज पर डेढ लाख सेवाकार्य ऐसे हैं ,जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चल रहे हैं । ये उम्मीद की वो किरणें है जो निराशा के घने अंधकार को चीरकर ये विश्वास जगाती हैं कि हर अंधकार से लड़ने के लिए कुछ दीपक निरंतर जलाए जा रहे हैं जिनकी रोशनी में अनगिनत जीवन जगमगाएंगे । इन कार्यों की सबसे बड़ी सफलता ये है कि, जिन लोगों की सेवा की गई वे आत्मनिर्भर तो बने ही खुद भी इस सेवायात्रा का हिस्सा बन गए ।

परिवर्तन के छोटे –छोटे रचनात्मक कार्यों ने विकास की कितनी ही कहानियाँ लिखी ।पर इन कहानियों को न कभी किसी समाचार पत्र ने लिखा, न किसी चैनल ने दिखाया । परिवर्तन यात्रा के इस स्तंभ में हम कुछ ऐसी ही सच्ची कहानियाँ लेकर आ रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आपका विश्वास प्रबल होगा कि वह दिन दूर नहीं   जब भारत  भूख ,गरीबी व अशिक्षा पर विजय पाकर विश्व का सिरमौर बनेगा ।