पढ़ाई भी बुनाई भी | इस आंगन में खिलते हैं नन्हें जीवन-मातृछाया, भोपाल | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - संघ के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

विद्यालय के बच्चों के साथ जन्मदिन मनाते डबरावासी

डबरा आवासीय विद्यालय भवन

परिवर्तन यात्रा

कर लिया जहां मुठ्ठी में

विजयलक्ष्मी सिंह

2017-10-16 14:41:22

……..तेज झटके के साथ जैसे ही एयरपोर्ट रनवे से हवाई जहाज़ आसमान की ओर उठा , पहली बार हवाई यात्रा कर रहे सोनू को थोड़ा डर सा लगा । एक अजीब सी सिहरन उसे रीढ़ में दौड़ती महसूस हुई। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के छोटे से गांव सिरौल का यह होनहार बालक  आज भारत की बेस बॉल टीम के लिए खेलने ऑस्ट्रेलिया जा रहा था ।बादलो को चीरते हुए जब  जहाज  ने अपनी यात्रा शुरू की तो सोनू की बचपन की वह यादें ताज़ा हो गई जब गांव के ऊपर से गुज़रते हवाई जहाज को देखकर  बेहद रोमांचित हो जाता था और तब तक उसके पीछे दौड़ता जब तक जहाज आंखों से ओझल नहीं हो जाता। सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद पिता संग मजदूरी के वह कठिन दिन भी उसके आगे कौंध गए। जीवन के तमाम झंझावतों को धता बता आज वह अपने सबसे बड़े सपने हवाई जहाज में खुद को पाकर ऐसा महसूस कर रहा था जैसे आज सारा जहान उसकी मुठ्ठी में है। ऐसा ही कुछ  गढ़ी के खेतिहर मजदूर परिवार में जन्मे भानसिंह को भी महसूस हुआ था जब 10 वीं में जिले में सबसे अधिक नंबर लाने पर उसे 26 जनवरी 2016 को मध्य्प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सम्मानित किया था। 
 सोनू की तरह ही सहरिया जनजाति के 171 बच्चे  आज डबरा में  सेवाभारती द्वारा संचालित बोर्डिंग स्कूल मे पढकर सफलता की राह पर चल पड़े है ।
प्रदेश की सबसे पिछड़ी जनजातियों मे से एक सहरिया  अब विलुप्ति की कगार पर है ।इन लोगों के  पास न तो अपनी जमीन है न ही कोई अन्य रोजगार । फसलों की कटाई या खेतों पर मजदूरी कर वे अपने परिवारों का पेट पालते हैं ,व सहरियाओं में लिट्रेसी रेट 10 % से भी कम था व शायद इतना ही बना रहता ।यदि संघ प्रचारक  व सेवाभारती के संस्थापक विष्णुजी की प्रेरणा से 10 जुलाई 2003 को 6 से 8वीं तक के बच्चों के लिए किराए के भवन में एक ऐसे जनजातीय आवासीय विद्यालय की शुरूआत न हुई होती, जहां छात्रों के रहने, खाने से ले यूनिफार्म व फीस तक का सारा खर्च मैनेजमेंट कमेटी उठाती है ।
सेवाभारती के प्रांत उपाध्यक्ष व शुरू से ही विद्यालय के प्रभारी रहे निर्मलदासजी बताते है कि इस विद्यालय में पढ़ाई के साथ – साथ बच्चों को बेसबाँल और थ्रोबांल जैसे खेलों की वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग एक प्रोफेशनल कोच के द्वारा दी जाती है । साथ ही स्कूल में स्टेट ऑफ द आर्ट कम्पयूटर एजुकेशन की भी पूरी व्यवस्था है । कभी 35 बच्चों के साथ शुरू हुए इस विद्यालय में जब छात्र संख्या 171 तक जा पहुंची तब स्कूल को अपनी बिल्डिंग की जरूरत पड़ी।.सहयोग के लिए आगे आए अमरीका से अप्रवासी इंजीनियर पंकज माहेश्वरी। उन्होंने अपने पिता व ग्वालियर के प्रख्यात डाक्टर स्वर्गीय के.जी महेश्वरी जी की स्मृति में भवन के लिए 20 लाख रूपए सहयोग राशि दी । इन बच्चों के बेहतरीन रिजल्ट व खेलों में जबर्दस्त परफार्मेंस से प्रभावित समाज के लोगों ने विद्यालय का खुले मन से सहयोग किया । कितने ही परिवार अपने बच्चों का जन्मदिन या अपने पुरखों का श्राध्द यहाँ विद्यालय में आ इन प्रतिभाशाली बच्चों के बीच आकर मनाते हैं । विद्यालय के प्रिंसिपल संजय रजक बताते हैं कि यहाँ रहकर 12 वीं पास करने वाले रामरस, सुनील सिंह व अमरसिंह का पैरामेडिकल में सिलैक्शन हुआ है ,जबकि 12 बच्चे इनकम टैक्स विभाग में व 4 स्टूडेंट्स वनविभाग में नौकरी हासिल कर चुके हैं। इन सभी छात्रों ने विद्यालय में संचालित कॉम्पिटिटिव एग्जामस के लिए विशेष गाईडेंस क्लासेस का भरपूर लाभ लिया।  खेल के क्षेत्र में बेसबाँल में इंदर सिंह  और थ्रोबाँल में अनिलकुमार नेशनल लेवल पर सिलैक्ट हुए हैं । संघ के स्वयंसेवको के सेवा समर्पण और अपने बुलंद इरादों की शक्ति के योग से आज इस जनजातीय विद्यालय के छात्र अपने सपनों के जहान को अपनी मुठ्ठी में कैद करने की कूवत रखते हैं।
कान्टैक्ट - निर्मलदास नारंग
9425481714

//