पढ़ाई भी बुनाई भी | इस आंगन में खिलते हैं नन्हें जीवन-मातृछाया, भोपाल | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - संघ के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

बच्चों के द्वारा बनाए गए सामान की प्रदर्शनी

अपने जीवन में कला के रंग भरते बस्ती के बच्चे

परिवर्तन यात्रा

आज बना रहे कल

अपर्णा सप्रे

2017-10-30 19:32:01

सच में दिल्ली की कलंदर कोलोनी का मस्त कलंदर ही था वह बालक- शकील। दिनभर बस धमाचौकड़ी, उछलकूद और आवारागर्दी में ही उसका मन रमता। घर के बड़ों की तमाम कोशिशों के बावजूद पढ़ाई और स्कूल उसके ठेंगे पर थे। गुरबत में जी रहे उसके मेहनतकश अब्बू-अम्मी उम्मीद लगाए बैठे थे कि शकील पढ़-लिख उनके बुढापे का सहारा बनेगा, पर अब उन्हें उसके रंग-ढंग देख अपनी उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा था। तभी ऐसा कुछ घटा कि ; उनकी टूटती उम्मीदों को रोशनी की नई किरण मिली। स्ट्रीट चिल्ड्रन प्रकल्प से जुड़े सेवा भारती के कार्यकर्ता उनकी बस्ती में पहुँचे , और उनकी नज़र शकील पर पड़ी। यह टीम शकील के घर पहुँची और उसको  संस्कारित करने और प्रशिक्षित करने के बारे में बात की तो शकील के पिता  तुरंत मान गए। बस फिर क्या था, शकील ने केंद्र जाना शुरू किया और देखते ही देखते उसने बिजली के काम में महारत हासिल कर ली। संघ के स्वयंसेवकों के संपर्क में आने से उसमें संस्कार के ऐसे अंकुर फूटे कि खुद उसे ही नही पता लगा कि कब वह अपने अब्बू-अम्मी का इतना आज्ञाकारी हो गया। आज बस्ती में शकील इलेक्ट्रीशियन के काम का हर कोई कायल है। वह अच्छे पैसे कमाता है और उसके माता -पिता बेहद खुश है।
वर्ष 1994 में सेवा भारती द्वारा घुमन्तु व उपेक्षित बच्चो के लिये शुरू किए गए इस स्ट्रीट चिल्ड्रन प्रकल्प के माध्यम से अब तक शकील सरीखे हज़ारों किशोरों के जीवन को एक नई दिशा मिल चुकी है। अब ज़रा दिलशहा विहार बस्ती के राजू दुबे को ही लें, यह किशोर खुद ही इस इलाके में चलने वाले केंद्र पर जाने लगा और वहां पूरे मनोयोग से कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त किया। आज यह उत्साही नवयुवक बी कॉम सेकंड ईयर की पढ़ाई के साथ-साथ प्रोजेक्टर कांट्रेक्टर का काम कर ठीक-ठाक पैसे भी कमाने लगा है। इसी तरह घुमंतू जीवन को पीछे छोड़ संतोष आज केंद्र पर मिली स्वालंबन की प्रेरणा  से बर्तनों की फेरी के व्यवसाय से जुड़ अच्छे पैसे कमाने लगा है। वह चाहता है उसकी पत्नी भी इस प्रकल्प से जुड़ काम करे।
 सेवा भाव से विचार से अंकुरित हुआ यह प्रकल्प आज स्वयंसेवकों के अथक प्रयासों से पल्लवित हो एक विशाल वट वृक्ष बन गया है, जिसकी छांव में हज़ारों किशोर जीवन सुसंस्कारों की सुगंध से सराबोर हो रहे हैं। शुरू में कठिनाइया आई ,पर बच्चो में आश्चर्यजनक बदलाव को देख अनेक परिवार जुड़ते गए। आज हजार से अधिक बच्चे इस प्रकल्प में प्रशिक्षण ले चुके हैं  सेवा भारती दिल्ली के वरिष्ठ कार्यकर्ता ज्ञानप्रकाश जी कहते हैं कि जब तक घुमंतू और उपेक्षित बच्चो को शिक्षित नहीं किया जाता तब तक देश के सर्वांगीण विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता। 
सेवा भारती का यह सेवाकार्य दिल्ली की बस्तियों की तंग गलियों  में कितने ही आवारागर्द किशोरों को निक्कमनेपन, काहिली और जरायम के अंधियारों में गुम हो जाने से पहले उनके जीवन मे स्वावलंबन से नई ऊर्जा भर देता है ।ट्रेनिंग के साथ मिले संस्कार उन्हें बेहतर इंसान तो बनाते ही है ,समाज को भी इन किशोरो के भटककर अपराधी बनने की चिंता से मुक्त कर देते है ।
 
संपर्क- राम कुमारजी
मोबाइल नंबर-  9312936897

//