जहाँ चाह, वहाँ राह ! | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

बगीचे मे सफाई करते बच्चें

साथ -साथ भोजन करते छात्र

परिवर्तन यात्रा

जीवन को दी नई दिशा

विजयलक्ष्मी सिंह

2018-03-20 15:29:30

लद्दाख की खूबसूरत वादियों में 2010 में जब बादल फटा तो कई जिंदगियां तबाह हो गईं । नीरज भी उन्हीं में से एक था | इस जलजले ने इस मासूम से उसका सबकुछ छीन लिया था। वो दर्द शायद पूरे जीवन नीरज के चेहरे पर चस्पा रहता, यदि सेवा भारती के कार्यकर्ता उसे दिशा छात्रावास में न लाए होते। किंतु आज नीरज पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहता | राष्ट्रीय स्तर तक खो -खो खेल चुके इस होनहार बालक ने 10वीं की गणित में 100 प्रतिशत अंक हासिल किए। नीरज जैसे 36 बच्चों के जीवन को वेलजी विश्राम पोपट दिशा छात्रवास ने नई दिशा दी है। यहाँ पढ़ रहे बच्चों में से अधिकांश वे हैं जिनके परिवार आतंकियों की क्रूरता का शिकार हुए हैं। संघ के प्रचारक व राष्ट्रीय सेवाभारती के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री जयदेवजी के प्रयासों से 9 बच्चों के साथ 2005 में मात्र 2 कमरों में इस छात्रावास की शुरूआत हुई थी । अब यहाँ बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत ,कम्प्यूटर तथा ड्राइंग भी सिखाई जाती है।
आज से 13 वर्ष पूर्व जब दिशा की शुरूआत हुई तब सेवा भारती के पास न तो इंफ्रास्ट्रक्चर था न ही कोई सहयोगी। बच्चों की स्कूल-फीस व भोजन का खर्च भी मुश्किल से निकलता था। तब बोस्टन में रहने वाले नरेंद्र पोपट ने इस नेक काम का सहभागी बनने का फैसला लिया। श्री पोपट ने अपने पिता वेलजी विश्राम पोपट की स्मृति 22 में लाख की सहयोग राशि इस प्रकल्प के लिए दी। जम्मू-कश्मीर सेवा भारती की अध्यक्ष अनुश्या खोसा की माने तो यहाँ बच्चों को शिक्षित व संस्कारित करने के साथ-साथ कठोर अनुशासन भी सिखाया गया है। चाहे वो बगीचे की साफ-सफाई हो या छात्रावास का प्रबंधन; सब-कुछ बच्चे ही करते है| आज होस्टल के पास 5 कमरे, एक कम्प्यूटर रूम, 4 गेस्ट रूम सहित एक बड़ा प्रार्थना कक्ष है, जहाँ सब साथ बैठकर पढ़ाई भी करते हैं। कुछ बड़े बच्चे अपनी रूचि से इलेक्ट्रीशियन, बढ़ई तथा जैविक खेती जैसी कौशल-विकास ट्रेनिंग भी ले रहे हैं।
माता वैष्णो देवी जहां विराजती हैं उसी त्रिकुटा पर्वत पहाड़ियों की तराई में स्थित कड़माल गांव में पानी की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। 300 फीट की खुदाई के बाद जाकर थोड़ा सा पानी मिल पाता था जो कि छात्रों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाता था। किंतु जल-प्रबन्धन के परंपरागत तरीकों को अपनाकर छात्रावास-प्रबन्धन ने रोज रोज के पानी के टैंकर्स के खर्च से लगभग निजात पा ली है| जल-प्रबन्धन के लिए बनाए गए तीन टैंको के चलते गर्मियों में भी हैंडपंप खूब पानी देते हैं, पानी की एक-एक बूंद का उपयोग हो इसलिए कपड़े धोने में इस्तेमाल किऐ पानी से ही बगीचे की सिंचाई की जाती है। प्राकृतिक आपदाओं व आतंकवाद से जूझ रहे जम्मू कश्मीर के लिए दिशा छात्रावास जैसे प्रकल्प उम्मीद की नई किरण बनकर उभरे हैं।
संपर्क सूत्र :- सुरेन्द्र त्यागी
मो. नं.:- 7051273549,

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