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अन्नपूर्णा योजना के तहत वृध्दाश्रम मे भेजे गये टिफिन

महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाये गये उत्पाद के साथ चन्द्रिका जी चौहान

परिवर्तन यात्रा

महिला उद्यमिता की मिसाल उद्योग वर्धिनी

विजयलक्ष्मी सिंह

2018-02-27 17:06:06

सुलोचना आज तक वो दिन नहीं भूली जब गर्भावस्था में गरम रोटी खाने की चाह के बदले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था । गरीबी ने जीना दुश्वार कर रखा था, उस पर बेकारी ने काम की तलाश में दर –दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया । परंतु आज बहुत कुछ बदल गया है, सोलापुर के मेनमार्केट में पद्मा टाकिज के ठीक सामने गणेश मार्केटिंग के नाम से उसकी होल सेल एजेंसी है ,जिसका सालाना टर्न-ओवर लाखों में है । वहीं साधारण सी गृहिणी अल्पना, चन्दनशिवे जिन्होंने कभी थोड़ा घर खर्च निकालने के लिए पापड़ बनाने की ट्रेनिंग ली थी , अब उभरती हुई इंटरप्रन्योर है । अल्पना आज 500 से अधिक महिलाओं को रोजगार दे रही है । अब मिलते हैं वैष्णवी से । कभी पैसे-पैसे के लिए संघर्ष करने वाली वैष्णवी का बूटिक अब फैशन की नवीनतम् डिज़ाइनों के लिए जाना जाता है । रोज –मर्रा की जरुरतों के लिए संघर्ष करती ऐसी ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महाराष्ट्र के सोलापुर नगर में 2004 में उद्योगवर्ध्दिनी की शुरूआत हुई। राष्ट्रीय सेवा भारती की नेशनल ट्रस्टी चन्द्रिका चौहान के प्रयासों से आरंभ हुई इस संस्था ने 600 स्वयंसहायता समूहों के जरिए दस हजार महिलाओं को रोजगार से जोड़ा । संघ के पूर्व प्रचारक रहे शंभू सिंह चौहान की धर्मपत्नी चन्द्रिका चौहान ने अपने जीवन संघर्ष से जो कुछ सीखा, उसे हजार गुना कर समाज मे बांटा । महिला उद्यमिता के क्षेत्र में मिसाल कायम करने वाली उद्योगवर्द्धिनी को इन्टरप्रन्योर ट्रेनिंग के लिए कई बार सर्वश्रेष्ठ संस्था के रूप में पुरस्कृत भी किया गया है।
भाकरी रोटी ( ज्वार की मोटी रोटी ) और मूंगफली की चटनी का नाम सुनते ही मराठी माणूस के मुंह मे पानी आ जाता है। महाराष्ट्र के आम आदमी की इस डिश को उद्योगवर्ध्दिनी ने आज यहां का पापुलर ब्राण्ड बना दिया है। प्रांत के इस परंपरागत भोजन को आधार बना कर चन्द्रिका जी ने आठ सौ बेकरियों को अपने साथ जोड़ा । इतना ही नहीं वृद्धाश्रम व् मरीजों के परिजनों को मात्र डेढ़ रुपये में पौष्टिक भोजन खिलाया है। ये तो उद्योग वर्धनी का महज एक आयाम है, संस्था ने सिलाई , कढ़ाई, केटरिंग पाॅटरी, दाल चावल साफ करने ,घरेलू मसाले तैयार करने, पुराने कपड़ों से बैग बनाने, त्यौहारों पर विशेष नमकीन तैयार कराने जैसे अलग- अलग व्यवसायों से महिलाओ के स्वयं सहायता समूहो को जोड़ कर इन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है । इतना ही नहीं महिलाओं को घर बैठे-बैठे पैसा कमाने के तरीके भी सिखाये गए व उसकी मार्केटिंग भी की गई।
अब बात करते हैं सुलोचना की ,चन्द्रिका ताई के पास जब वो आई थी तब कई घरों में चौका बासन किया करती थी। नाविक समाज से ताल्लुक रखने वाली इस महिला को चन्द्रिका जी ने हेयर कटिंग सैलूनो पर ब्लेड बेचने के लिए प्रेरित किया ।संस्था के निरंतर मार्गदर्शन व सहयोग से धीरे – धीरे सुलोचना ने सैलून के लिए जरूरी सामानों की छोटी दुकान शुरू की। आज वो दुकान सोलापुर की सबसे बड़ी होल सेल एजेंसी बन चुकी है। अब उद्योगवर्ध्दिनी की मार्केटिंग टीम की प्रमुख सुलोचना ने हाल ही में सैलून में लगने वाली कुर्सियों की फैक्ट्री भी शुरू की है ।
अहमदाबाद से सोलापुर आकर बसी साधारण सी गृहिणी चन्द्रिका चौहान ,शायद कभी घर की दहलीज के बाहर कदम भी न रख पाती यदि पति की ओपन हार्ट सर्जरी ने घर का आर्थिक समीकरण ना गड़बड़ाया होता। तब उन्हें टेलरिंग व कढ़ाई के गोल्ड मैडल वाली डिग्री काम आई व सिलाई , कढ़ाई के जरिए वे स्वयं आत्म निर्भर बनी ।संघ के तत्कालीन प्रांतीय संघ चालक डॉ कुकड़े की प्रेरणा से चन्द्रिका जी ने अपनी इस प्रतिभा का उपयोग अन्य महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए भी काम करना शुरू किया। सोलापुर की घोत्रेकर बस्ती की झोपडी में शुरू हुए पहले सिलाई केंद्र से जो यात्रा शुरू हुई उसने महिला उद्यमिता की ट्रेनिंग में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। आज उद्योगवर्धिनी के पास अपना रोटी – घर है जिसमें प्रति दिन पांच हजार रोटियां बनती हैं । जो विभिन्न स्कूलों व अस्पतालों मे जाती है। इनकी रसोई में प्रति दिन ढाई से तीन हजार लोगों का खाना बनता है जो कई घर बैठी महिलाओंको भी रोजगार दे रहा है । संस्था प्रतिमाह दो क्विन्टल मूंगफली की चटनी भी बेचती है। दीवाली व होली जैसे त्योहारों में यहां बनने वाले तरह – तरह के नमकीन विदेशों में भी जाते है ।समाज के प्रति संवेदनशीलता ही संस्था का आधार है। यहां आने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ – साथ भारतीय संस्कृति, देश व् समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी सिखाया जाता है। संस्था नेत्रहीन बच्चों के हाथ से बनाये गये बैगों की मार्केटिंग भी करती है।
संघ के केन्द्रीय सेवा टोली के सदस्य व् वरिष्ठ प्रचारक श्री उदय जोगलेकर जी बताते हैं कि उद्योग वर्धिनी की सफलता को देखकर राष्ट्रीय सेवा भारती ने महिलाओं के विकास के लिए चल रहे स्वयं सहायता समूह के बैभव श्री योजना का दायित्व उन्हें दिया है। देश भर मे स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने की इस मुहिम में चन्द्रिका जी देश भर में विभिन्न प्रान्तों मे महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही है।
संपर्क सूत्र-: चंद्रिका चौहान
मो. नं.-: 9422069455

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