पढ़ाई भी बुनाई भी | इस आंगन में खिलते हैं नन्हें जीवन-मातृछाया, भोपाल | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - संघ के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

परिवर्तन यात्रा

सिल्क से साड़ी बनने की प्रक्रिया

पढ़ाई की सलाई से बुनी सफलता

विजयलक्ष्मी सिंह

वे सभी अनपढ़ थे , अपने बच्चों को भी अपने साथ दिनभर इसी काम में लगाए रखना उनकी मजबूरी थी । पूरा परिवार काम करता था तब जाकर कहीं इनको दो जून की रोटी नसीब हो पाती थी । विडंबना ये थी कि सिल्क वीविंग जैसे महीन काम में दिनभर लगे रहने के बाद जब मजदूरी लेने की बारी आती ,तो ये बुनकर अकसर ठगे जाते । जिन्हें

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समर्पित जीवन

एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी

श्याम परांडे

50 के दशक में शुगर टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री , हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड का ज्वाइनिंग लैटर 23 बरस के एक युवक के लिए करियर की शुरुआत इससे बेहतर और क्या हो सकती थी | पर शायद बैंगलौर से 90 किलोमीटर दूर अक्कीरामपुर के

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सेवादूत

बाढ़ से बचाई हज़ारों जिंदगियाँ– गुजरात बाढ़ में स्वयंसेवकों का भागीरथी अभियान

विजयलक्ष्मी सिंह

यूं तो अक्सर आपदाएं बता कर नहीं आती, मगर कई बार वह बाकायदा मुनादी करवा कर भी चलीं आती हैं- जुलाई 2017 में गुजरात में भी कुछ ऐसा ही घटा। राजस्थान के जैतपुरा बांध से निकला पानी गुजरात आते -आते भीषण बाढ़ मे बदल गया । अब तक जिन गाँवो में लोगों ने अपनी जिंदगी में कभी 2 फीट पानी भी नहीं देखा था, वे प्रशासन की खतरे की चेतावनी को गंभीरता से क्यों लेते ! पहली सूचना मिलते ही सर पर कफन बांध खतरे की जद में आने वाले गांवो की ओर चल पड़े स्वयंसेवक एक्शन प्लान बना व स्वयंसेवकों की सजगता व तत्परता ने हजारों जिंदगियाँ बचा लीं । जिस क्षण प्रशासन ने राजस्थान से गुजरात की ओर तेज़ी से उफनते बांध के अनियंत्रित पानी से बाढ़ की चेतावनी जारी की, तभी संघ टीम एक्टिव हो ग्ई ....23 जुलाई.... की रात के करीब 1 बजे पालनपुर जिले के सेवाप्रमुख गोविंदभाई प्रजापति को पता चला कि राजस्थान से बाँध का पानी तेज रफ्तार से गुजरात की तरफ बढ़ रहा है, तो तत्काल ही धानेरा ,बनासकांठा और डीसा आदि में वरिष्ठ स्वयंसेवकों के मध्य

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