जहाँ चाह, वहाँ राह ! | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

परिवर्तन यात्रा

सब मिलकर साथ पढ़ते हुए

उम्मीद की नई सुबह- वात्सल्य विद्या मंदिर कानपुर

शैलजा शुक्ला

काल के क्रूर प्रहार, ने इनसे इनके अपने छीन लिए थे । वनवासी(जनजाति) क्षेत्रों के इन निर्धन अनाथ बच्चों का बचपन कभी न खत्म होने वाली गुरबत की अंधेरी सुरंग में बीत जाता यदि वात्सल्य मंदिर में उन्हें स्नेह भरी छांव व शिक्षा का उजाला न मिला होता । आज इनकी आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने भी हैं , व उनके पूरा होने का विश्वास भी । आईआईटी की आँल इंडिया रैंकिंग में 320 वें नंबर पर रहा व आज एम .एन. आई. टी. से इंजानियरिंग कर रहा, ब्रजेश थारू , हो या फिर एन. डी. ए. की तैयारी कर रहा पवन पाल दोनों यहां महज 4 बर्ष की उम्र में आए थे ।

और जानिये

समर्पित जीवन

महान तपस्वी - कात्रे गुरु जी

चले निरंतर साधना - कात्रे गुरुजी

विजयलक्ष्मी सिंह

कुष्ठ रोग की कल्पना मात्र से ही मन सिहर उठता है, गल चुके हाथ पैर, घावों से रिसता मवाद, आसपास भिनभिनाती मक्खियाँ, समाज से बहिष्कृत घृणा के पात्र, नारकीय जीवन जीते रोगी । आज से 50 वर्ष पहले जब इनके अपने इन्हें अभिशाप मानकर त्याग देते थे, तब किसी ने अपने स्नेह

और जानिये

सेवादूत

मुश्किल के साथी

विजयलक्ष्मी सिंह

नियति का एक सिर्फ .एक झटका इंसान का सब कुछ नष्ट कर सकता है। भोपाल में भी कुछ ऐसा ही खेल नियति ने खेला, और पाई-पाई कर जोड़ी गृहस्थियां एक ही पल में भस्म कर डालीं। ....9 अप्रैल 2018 को 12 बजे तपती दोपहरी में भोपाल की पॉश रिहाईश साकेत नगर से सटी झुग्गियों में गैस सिलेंडर फटने से लगी भयानक आग जब यहाँ रहने वाले बेबस लोगों के छोटे- छोटे सपनों को राख के ढेर में तब्दील कर रही थीं, तभी कुछ नौजवानों का एक दल देवदूतों की तरह प्रकट हुआ। अब वहां इन बेबस लोगों और निर्मम नियति के बीच दीवार बन कर अगर कोई खड़ा था, तो वह थे खाकी नेकर पहने यह नौजवान गणवेशधारी स्वयंसेवक, जिन्होंने अपने साहस और सेवा भाव से इस बस्ती के लोगों पर पड़ी नियति की टेढ़ी नज़र के असर को कम करने का हर संभव प्रयास किया ।

और जानिये
//