पढ़ाई भी बुनाई भी | इस आंगन में खिलते हैं नन्हें जीवन-मातृछाया, भोपाल | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - संघ के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

सेवादूत

विधाता ने देश में कितनी ही विनाशलीलाएँ रची.,कभी गुजरात में आए भूकंप ने कच्छ व अंजार में सबकुछ तबाह कर दिया ,तो कभी उड़ीसा में इतना पानी बरसा कि हजारों घर पानी-पानी हो गए ।हमनें बिहार में कोसी का रौद्र रूप भी देखा व केदारधाम के जलप्रलय में डूबती जिंदगियाँ भी । ।आपदा की इन घड़ियों में घायल तनों व मनों पर मरहम लगाने सबसे पहले पहुँचे संघ के स्वयंसेवक ।केदारघाटी में पहला हैलीपेड बनाने से लेकर जलप्रलय, में अपनों को खो चुके बच्चों की पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था करने तक यह सेवायात्रा चलती रही ।आज भी उत्तराखंड दैवीय आपदा समिति इस जलप्रलय में तबाह हुए लोगों के पुनर्वास में लगी है ।

संघ का जन्म आपदा में मदद करने के लिए नहीं हुआ है, परंतु शाखा का संस्कारमय व देशप्रेम से परिपूर्ण माहौल स्वयमसेवकों को देश के लिए जीना सिखाता है  व उनके मन में समाज के प्रति संवेदना जगाता है । संघ पर लोगों का विश्वास इस कार्य की आधारशिला है , चाहे लातूर में आया विनाशकारी भूकंप हो या चैन्नई में आई तुसुनामी समाज के हर वर्ग ने राहत कार्यों में तन मन धन से संघ का साथ दिया है  । आपदा बीतते ही जब सब संगठन अपना बोरिया बिस्तर समेट लेते हैं, व सरकारी तंत्र भी सुध लेना छोड़ देता है, तब भी रिहेबिलिटेशन     तक संघ कार्य चलता रहता है । । संघ के  उग्र हिंदुत्व को निशाना बनाने वाली मीडिया ने कभी भी स्वयंसेवकों की भूमिका को नहीं सराहा । ,।सेवागाथा के इस कांलम में हम ऐसे ही सेवादूतों की सच्ची कहानियाँ लेकर आए हैं, जिन्होंने प्रकृति के प्रकोप के बीच कराहती मानवता पर सामाजिक आस्था व आत्मीयता का लेप लगाया हैं ।इन्होंने विनाश के खंडहरों में उगाए है आस्था के वे फूल जिनसे कई पीढ़िया महकेंगी ।

 

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